शुभ मुहूर्त मार्गदर्शिका
अन्नप्राशन मुहूर्त के लिए पंचांग, तिथि, नक्षत्र और पारंपरिक नियमों का यह संदर्भ पढ़ें। बड़े निर्णयों के लिए अपनी जन्म कुंडली और स्थानीय समय भी ध्यान में रखें।
शिशु का प्रथम अन्न ग्रहण संस्कार
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अन्नप्राशन (जिसे बंगाल में भात खिलाने की विधि या मुखे भात भी कहा जाता है) एक वैदिक संस्कार है जिसमें शिशु पहली बार ठोस आहार का स्वाद लेता है। यह शिशु के जीवन के 5वें से 8वें महीने के बीच किया जाता है। प्रथम ठोस आहार सामान्यतः चावल या खीर (दूध और चीनी में पका हुआ चावल) होता है। यह एक प्रमुख विकासात्मक मील का पत्थर होता है और इसे पारिवारिक प्रार्थनाओं तथा विधि-विधानों के साथ मनाया जाता है।
अन्नप्राशन परंपरागत रूप से पुत्रों के लिए 6वें महीने और कन्याओं के लिए 5वें महीने में किया जाता है। तथापि, आधुनिक बाल रोग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन भी वैदिक समय-सीमा के अनुरूप हैं, क्योंकि 6 माह की आयु ठोस आहार आरंभ करने के लिए उचित मानी जाती है। शुभ मुहूर्त के आधार पर ही यथार्थ तिथि का चयन करना चाहिए।
पुष्य नक्षत्र अन्नप्राशन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह पोषण से संबंधित है (पुष्य का अर्थ है 'पोषण करना')। रोहिणी भी उत्कृष्ट है। हस्त, अनुराधा, श्रवण और रेवती अन्य शुभ विकल्प हैं। इस संस्कार में राहुकाल और चंद्रमा के आश्लेषा, ज्येष्ठा या मूल नक्षत्र में होने से बचना चाहिए।
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