पुनरावर्ती / मासिक · पूरे वर्ष, प्रतिमाह एक बार
इसे यह भी कहते हैं संकष्टी गणेश चतुर्थी · संकटहरा चतुर्थी
कब रखा जाता है
बार-बार आने वाले व्रत की सही अगली तारीख इस माह के पंचांग से जांचें।
महत्त्व
संकष्टी का अर्थ है 'कठिनाई से मुक्ति'। यह व्रत भगवान गणेश से अपने भक्तों के मार्ग की बाधाओं को दूर करने, चाहे वे स्वास्थ्य, कार्य अथवा पारिवारिक विषयों से संबंधित हों, की प्रार्थना के लिए रखा जाता है। यह गणेश भक्तों के बीच सबसे व्यापक रूप से पालन किए जाने वाले मासिक व्रतों में से एक है।
कथा
पौराणिक वृत्तांतों में गणेश जी के अनेक बाधा-निवारक चमत्कारों का वर्णन मिलता है — सबसे अधिक स्मरण किया जाने वाला कथा कोल्हापुर अथवा मथुरा से जुड़ी संकष्टी की कथा है, जिसमें एक भक्त का इस तिथि पर किया गया व्रत और गणेश की पूजा उसकी विशिष्ट कठिनाई को दूर करती है, और इसी से इस दिन का नाम तथा चंद्रोदय तक उपवास की चिरंतन परंपरा प्राप्त होती है।
पूजा-विधि
पूरे भारत में
यह व्रत विशेष रूप से महाराष्ट्र में अत्यंत प्रचलित है, जहाँ अधिकांश गणेश-भक्त परिवार इसे प्रतिमास नियमित रूप से रखते हैं, और पश्चिमी तथा दक्षिण भारत की अन्य गणेश-केंद्रित परंपराओं में भी यह प्रचलित है। वर्ष की सबसे अधिक मान्यता अंगारकी चतुर्थी (मंगलवार को पड़ने वाली) को ही प्राप्त होती है।
प्रश्न
संकष्टी का अर्थ है 'कठिनाई से मुक्ति'। यह व्रत प्रतिमास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश से बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना हेतु रखा जाता है।
परंपरानुसार केवल सायंकालीन चंद्रोदय के पश्चात, जब भक्त भोजन ग्रहण करने से पूर्व चंद्रमा को अर्घ्य (जल) अर्पित करते हैं।
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तब उसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है और वर्ष में इस व्रत के सबसे प्रभावशाली स्वरूप को ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
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